शुक्रवार को धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म गिप्पी प्रदर्शित होने जा रही है। युवावस्था की दहलीज़ पर पहला कदम बढाने वाली कोई लड़की इस दौरान किन मानसिक और शारीरिक बदलावों से गुजरती है, उस दौर की एक पड़ताल है गिप्पी। पिछले पांच साल के दौरान वर्जित विषयों पर फिल्म बनाने का चलन तेज़ी से बढ़ा है। इन विषयों को वर्जित इसलिए कहा जा रहा है क्योकि भारतीय परिवेश में अब तक समलैंगिकता और सेक्स परदे के पीछे ही साँसे लेते थे लेकिन ऐसा लग रहा है कि वर्जनाओं को तोड़ने का जो भूचाल समाज के हर छोर पर देखा जा रहा है, वो भूचाल अब हिंदी फिल्मों में प्रतिबम्बित होने लगा है। पिछले शुक्रवार प्रदर्शित हुई बॉम्बे टाकिज में करण जौहर की कहानी में भी ये काला सच नज़र आया था। महानगरीय संस्कृति में देखे तो ऐसे रिश्तों को सहज ही स्वीकार लिया जा रहा है। अब कोई गे खुलकर अपनी पहचान बताने में नहीं सकुचाता, मैंने अपने मुंबई प्रवास के दौरान ऐसे कई लोग देखे, जो समाज की परवाह ना करते हुए अपनी पहचान उजागर कर रहे हैं। ये वो विस्फोट है जिसे भारतीय समाज ने अपने कालीन के नीचे हजारो सालो से दबा रखा था। गिप्पी के संवादों पर कड़ी प्रतिक्रिया हुई है और ये सच भी है कि ऐसे संवाद सारी हदें पार कर रहे हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बड़ी चीज है लेकिन इसे लेने से पहले अपनी सामजिक जिम्मेवारी भी देखने की जरुरत है, जो धर्म प्रोडक्शन देख नहीं रहा है। तेरह-चौदह साल की उम्र बहुत नाजुक होती है बिलकुल कोरी स्लेट की तरह। ये बात तयशुदा है कि कई लडकिया अपने अभिभावकों से छुपकर ये फिल्म देखेगी। इसमें से कुछ अच्छी और कुछ बुरी बातें सीखेंगी। पश्चिम में हर तरह की स्वतंत्रता दिए जाने के जो नतीजे आये हैं, वो बड़े भयावह है। आज भी अमेरिका में बच्चे किशोरवय में आते ही घर छोड़ देते हैं, बिना परिपक्व हुए निर्णय लेते हैं। एक विडियो गेम है सेन अन्द्रियास। अमेरिकन सरकार ने अब उस गेम पर रोक लगा दी है क्योकि अध्ययन में पाया गया की ये गेम खेलने के बाद बच्चे बहुत जल्दी सेक्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हालाँकि ये गेम भारत में जबरदस्त खेला जा रहा है। जिस विस्फोट के कारण पश्चिम ने अपना चरित्र खो दिया, उसी विस्फोट का आगमन हमारे घरों में भी हो चुका है। गिप्पी तो उसकी एक झलक मात्र है। यदि ये फिल्म स्वीकार कर ली जाती है तो आगे आने वाली और नंगी फिल्मों के लिए समाज को तैयार रहना चाहिए। मैं ये कतई नहीं कहने जा रहा कि गिप्पी पूरी तरह से बुरी फिल्म होगी लेकिन ये भी देखना जरुरी है कि ऐसे विषयों के साथ हमारे फिल्मकार कितनी सामजिक जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं।

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