वो 1934 का साल था जब पहली बार फिल्म प्रोड्क्शन ने एक कम्पनी की शक्ल इख्तियार कर ली थी। देविका रानी, राजनारायण दुबे, हिमांशु राय ने मिलकर बॉम्बे टाकिज की स्थापना की। उस वक्त मुंबई के अपेक्षाकृत छोटे इलाके मलाड में शुरू हुए बॉम्बे टाकिज ने अपने इतिहास में 102 फिल्मे बनाई और भविष्य के हिंदी सिनेमा का सुनहरा भविष्य तय कर दिया। इस साल भारतीय सिनेमा का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। इस मौके पर विअकॉम 18 मोशन पिक्चर्स हिंदी फिल्म ' बॉम्बे टाकिज' प्रदर्शित कर रहा है। भारतीय सिनेमा को आदरांजलि कही जा रही ये फिल्म खुद में चार कहानिया समेटे हुए है। करण जोहर, अनुराग कश्यप, दिबाकर बनर्जी और जोया अख्तर ने अपनी लघु कहानियो के निर्देशन की कमान संभाली है। इसी दिन शूट आउट एट वडाला भी प्रदर्शित हो रही है और सच यही है कि दर्शक बॉम्बे टाकिज के बजाय इस फिल्म पर पैसे खर्च करना चाहता है। दर्शक को बस अपने टिकट की पूरी कीमत वसूलना होती है, शताब्दी वर्ष से उसे कुछ लेना देना नहीं होता। शूट आउट एट वडाला का पोस्टर देखते एक युवा से मैंने पूछा कि जो सिनेमा तुम्हे तनाव भरी जिन्दगी में दो पल मुस्कुराने का मौका देता है क्या उसके सम्मान में वो ' बॉम्बे टाकिज' देखना चाहेगा। उसने जो जवाब दिया, आप भी सुनिए। उसने कहा ' काहे का सम्मान, बदले में हम पैसे भी तो खर्च करते है। ये कडवी सच्चाई है लेकिन इससे फिल्म के निर्माताओ को फर्क नहीं पड़ेगा क्योकि वे जानते हैं कि कम ही लोग ये फिल्म देखेंगे इसलिए उन्होंने ऐसा बजट बनाया है कि पहले दिन ही फिल्म मुनाफा कमाने लगेगी। इस फिल्म को देखने के लिए मैं बहुत बेकरार हू, ख़ास तौर से नवाजुद्दीन सिद्दीकी का काम देखने के लिए। बस कल का इंतज़ार और शनिवार को मिलूँगा फिल्म की ताज़ी रिपोर्ट के साथ।

1 comment:
कृपया विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए जितना हो सके, इंटरनेट से सूचनाएं लेने से बचें। ये बात मैं बॉम्बे टॉकीज़ के संदर्भ में कह रहा हूं क्योंकि न तो राजनारायण दुबे नाम के व्यक्ति का बॉम्बे टॉकीज़ से कोई सम्बंध था और न ही इस बैनर ने 102 फ़िल्में बनाई थीं। ये सब राजनारायण दुबे नाम के व्यक्ति के पौत्र की चाल है जो इस मशहूर नाम को भुनाकर फिल्मों में हीरो के तौर पर स्थापित होने की कोशिशों में है। आप कह सकते हैं कि ये व्यक्ति फ़्रॉड है जिसने बॉम्बे टॉकीज़ के मूल "लोगो" तक पर अपने दादा की तस्वीर चस्पां कर देने का कारनामा कर दिखाया है। बॉम्बे टॉकीज़ पर पूरी रिसर्च के साथ तैयार किया गया आलेख आप यहां पर देख सकते हैं -
http://www.beetehuedin.blogspot.in/search/label/studio%20%3A%20Bombay%20Talkies
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