Monday, April 29, 2013

इसे कहते है धोखाधड़ी

पहले ये कोशिश होती थी कि फिल्म में ऐसा क्या डाला जाये जिससे कि तगड़ी ओपनिंग लग जाये, आज फिल्म को बेहतर बनाने की नहीं बल्कि पैकेज बेहतर बनाने की कोशिशे होती हैं और कामयाब भी। भाई अब सीधा सा हिसाब है कि देशभर के हजारो स्क्रीन एक साथ बुक कर लो, फिल्म में सलमान या अक्षय को ले लो। अब करना ये है कि किसी पुरानी फिल्म का नाम जोड़ लो और जोर जोर से ये झूठ बोलो कि ऐसी फिल्म आज तक बनी ही नहीं। दर्शक सयाना नहीं है और ऐसी त्लिस्मी पैकेजिंग में वो फंस जाता है। बस यदि पहले दिन ओपनिंग लग गई तो बाद में क्या करना है। एक हफ्ते में पैसा वसूल और कई टीवी चेनल तो आपकी फिल्म खरीदने के लिए लाइन में खड़े ही हैं। जब दर्शक अपना पैसा लुटाकर बाहर आता है तो किसी से नही कहता कि मैं ठगा गया हूँ। दर्शक को अपना घटिया माल बेचने का ये नया तरीका है जो खूब चल रहा है। ये खुरापात सबसे पहले यशराज फिल्म्स ने शुरू की और बाद में सभी को दर्शक को लूटने की ये तरकीब पसंद आई। ऐसी कुछ फिल्मे है जब तक है जान, दबंग-2, आशिकी-2, रेडी, एजेंट विनोद आदि। ये भी एक ऐसा धोखा है, जिससे हमें उपभोक्ता फोरम भी नहीं बचा सकता। कम बजट में प्रदर्शित आशिकी-2 को रविवार तक स्मेश हिट घोषित कर दिया गया है। आधे से ज्यादा दर्शको को ये फिल्म किसी सर दुखाऊ अभियान से ज्यादा नहीं लगी। भट्ट परिवार ने तो आशिकी का इस्तेमाल कर माल कूट लिया, अब आप अपना दिल कुटा करें, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

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