हाल ही में आशिकी-२ देखकर शिद्दत से ये महसूस हुआ कि परदे पर नायक-नायिका
में केमिस्ट्री का झलकना कितना जरुरी है। इस फिल्म में मुझे कही भी इस
केमिस्ट्री के दर्शन नहीं हुए। एक फिल्म का जिक्र करना चाहूँगा, टॉम क्रूज़ की नाईट एंड डे। यहाँ नाईट का मतलब रात नहीं बल्कि योद्धा वाला नाईट। निर्देशक जेम्स मेनगोल्ड ने एक सीक्रेट एजेंट नाईट और
मासूम लड़की जून हेवन्स की प्रेम कहानी को एक्शन दृश्यों की पृष्ठभूमि में
रचा है। इस फिल्म के एक सीन का जिक्र करना चाहूँगा, इसके हर शॉट में बस इश्क, इश्क और इश्क झलकता है, जबकि चारो ओर से गोलिया चल रही हैं। जून को एक खतरनाक आतंकी अपहरण कर स्पेन ले आया है, सयोंगवश यहाँ नाईट पहुच
जाता है। नाईट को देखकर जून की जुबान पर वो बात आ जाती है जो वह हमेशा कहने
से बचती रही है. कुछ देर पहले ही जून को सच उगलवाने के लिए नशे के इंजेक्शन लगाए गए है। जून
तो मीरा की तरह नाईट के लिए बावली है। आज इतने खतरे में होने के बाद भी वह
नाईट से कह देती है कि जाने कबसे वह नाईट पर फ़िदा है। नाईट भोचक्का है
क्योकि इस ये समय तो जान बचाकर भागने का है। लेकिन नाईट भागता नहीं, वो
उठता है और जून की ओर चलना शुरू करता है। इतने में दो गोलिया लगभग उसके कान
के पास से होकर गुजर जाती है। नाईट बढ़ता है और फ़ौरन जून को चूम लेता है।
इस सीन की रग रग में एक्शन है लेकिन टॉम क्रूज़ और केमरान डियाज़ की
केमेस्ट्री प्यार के गुलाब खिला देती है। इस सीन में निर्देशक ने हिंसा के अतिरेक के बावजूद प्रेम को तीव्रता को
सर्वोपरि रखा है। आशिकी से खाली आशिकी-2 बनाने वाले यदि ऐसी निर्देशकीय समझ
रखे तो दर्शक कहानी से जरुर जुड़ेगा, वरना बेडा गर्क तो होना ही है।

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