Wednesday, April 24, 2013

याद आ गई वो आशिकी


Add caption
लम्बे वक्त से हिंदी सिनेमा का पर्दा खून से लाल हो रहा था। आमिर खान की गजनी के बाद ट्रेंड कुछ इस कदर बदला कि शुक्रवार को प्रदर्शित होने वाली हर दूसरी फिल्म साउथ की रीमेक होने लगी। सलमान खान और अजय देवगन रीमेक के इस दौर का फायदा उठाने वाले सितारे साबित हुए हैं। लेकिन हर ट्रेंड की एक तय उम्र होती है और हाल ही में बुरी तरह पिटी संजय दत्त की जिला गाजियाबाद इस बात का सबूत है कि ट्रेंड तेज़ी से बदल रहा है। क्या प्रेम कहानियो का दौर वापस लौट रहा है? इसकी एक हलकी सी झलक आशिकी-२ के गीतों की जबरदस्त लोकप्रियता से मिल रही है। ' क्योकि तुम ही हो' आज गली-गली में सुना जा रहा है। संगीतकार मिथुन ने इस फिल्म के गीत कुछ इस तरह रचे हैं कि ये हर उम्र के लोग सुन रहे हैं। ये सब देखकर महेश भट्ट की आशिकी के दिन याद आ जाते हैं। ना कोई सीडी, ना ही डीवीडी फिर भी नए गीतों के लिए युवा वर्ग की दीवानगी देखने लायक थी। १९८९ का वो साल जब महेश भट्ट ने अपनी इस महत्वाकंशी फिल्म के लिए ऐसे संगीतकार तलाश रहे थे, जिसके संगीत में ताजगी हो। आखिरकार युवा संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण को आशिकी का संगीत देने की जिम्मेदारी मिली और उसके बाद जो कुछ हुआ वो इतिहास में दर्ज हो गया। आशिकी के गीत जबरदस्त हिट हुए और इंडस्ट्री को नए सितारे मिले। उस वक्त नए गानों के बारे में रेडिओ से ही पता चलता था क्योकि तब तक टीवी इंडस्ट्री अपने शैशवकाल में थी। मुझे याद है उस वक्त इस फिल्म के कैसेट दुकानों से खत्म हो जाया करते थे, इतनी दीवानगी थी इस फिल्म के संगीत के लिए। आज तेरह साल बाद इतिहास खुद को दोहराता दिख रहा है। आशिकी-२ के दमदार संगीत के चलते इसे बॉक्स ऑफिस पर हॉट केक माना जा रहा है। पता नहीं क्यों मगर ऐसा लगता है कि कुछ क्रिएशन सीधे दिल से बन्दुक की गोली की मानिंद बाहर निकलते है और पूरी दुनिया पर छा जाते है और आशिकी-२ का संगीत भी  ऐसा ही एक क्रिएशन है जो खुदबखुद किसी फुल की तरह सतह पर खिल गया। 

No comments: