प्रकाश झा की आगामी फिल्म सत्याग्रह में भारी भरकम सितारों की फ़ौज दिखाई दे रही है। अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, करीना कपूर, मनोज वाजपेयी और अर्जुन रामपाल प्रकाश झा की सत्याग्रह ब्रिगेड के सबसे ख़ास लड़ाके हैं। सभी जानते हैं कि 'सत्याग्रह' समाजसेवी अन्ना हजारे के बहुचर्चित आन्दोलन पर आधारित है। आज मैं हिंदी फिल्मो के कलाकारों की ऑन स्क्रीन इमेज के बारे में बात करना चाहता हूँ। आज ही करीना कपूर का इंटरव्यू पढ़ा, जिसमे वे कह रहीं थी कि फिल्म में मेरा किरदार बहुत दमदार है। करीना बहुत प्रतिभाशाली कलाकार हैं। बीते साल उनकी पांच फ़िल्में प्रदर्शित हुई, जिनमे दो फिल्मे मेहमान कलाकार की भूमिका वाली थी। 2012 में उनके निभाए सारे किरदार ग्लेमरेस थे। एक 'हिरोइन' फिल्म ही ऐसी रही, जिसमे करीना का अभिनय दिखाई दिया। पिछले दो सालो में निभाई भूमिकाओ ने उनकी ग्लेमरेस इमेज बना दी है। अब उन्हें प्रयोगधर्मी कलाकार नहीं माना जा रहा है, ये उपाधि उनकी जूनियर विद्या बालन पर ज्यादा जंचती है। दबंग-2 में निहायत ही सस्ते से गीत 'फेविकोल' के जरिये वे रातों-रात 'हॉट' का तमगा पा लेती हैं और अगले साल सत्याग्रह जैसी फिल्म में एक पत्रकार की भूमिका स्वीकार लेती हैं। लेकिन क्या इतनी ही तेज़ गति से दर्शको के मन से अपने प्रिय सितारे की इमेज हटाई जा सकती है। क्या करीना एक पत्रकार की गंभीर भूमिका में स्वीकार कर ली जायेंगी, जवाब है, शायद ना। करीना अपने कप्तान प्रकाश झा की उम्मीदों पर तो खरी उतरेंगी लेकिन एक सितारे के रूप में उनके प्रशंसको के बारे में कहना मुश्किल है। प्रकाश झा के दुसरे सितारे अजय देवगन भी फिल्म में बेहद ख़ास भूमिका में होंगे। 2010 में प्रकाश झा की ही फिल्म 'राजनीति' में उन्होंने बेहद शानदार अभिनय किया था लेकिन उसके बाद के दो सालों में उन्होंने अंधाधुंध मसाला फिल्मे की है। अब वे 'सिंघम बोल बच्चन' बन चुके हैं और एक दर्जन मसाला फिल्मों के जरिये बॉक्स ऑफिस पर सौ करोड़ की टकसाल बन चुके हैं। सवाल वही है कि क्या अब फिर वे अपने नए किरदार की चमड़ी में फिट होंगे। यहाँ शाहरुख़ खान का उदारहण देना चाहूँगा। शुरूआती दिनों में निभाए किरदार उनके पुरे करियर पर हावी हो गए। डीडीएलजे का राहुल शाहरुख़ के सारे किरदारों से झांकता दिखाई देता है। यहाँ रा-वन का जिक्र करना चाहूँगा। शाहरुख़ ने सोचा कि केवल सुपरहीरो का सूट भर पहन लेने और उनकी स्टार इमेज के सहारे फिल्म की नैया पार हो जायेगी। लेकिन दर्शको ने रा-वन को दिवाली का बुझा हुआ पटाखा बना दिया। इस फिल्म के स्टंट सीन को याद कीजिये और शाहरुख़ की दौड़ देखिये, आपको लगेगा कि डीडीएलजे का राहुल ट्रेन के पीछे भाग रहा हो। यदि ये किरदार ऋतिक रोशन को दिया जाता तो वो अपना व्यक्तित्व ही इस किरदार के अनुरूप ढाल लेते। कहने का मतलब यही है कि यदि ऑन स्क्रीन इमेज ब्रेक करनी हो तो फिल्मो में एक अंतराल जरुरी होता है ताकि दर्शक आपकी पिछली इमेज को भूल सके। आमिर खान और ऋतिक रोशन की मिसाल दी जा सकती है। ये ऐसे कलाकार हैं जो बड़े सितारे होते हुए भी बॉक्स ऑफिस की टकसाल बनना मंजूर नहीं करते। और ऐसे ही चंद कलाकारों के दम पर फिल्म उद्योग का असली स्टारडम जिन्दा है।

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