अभी दो दिन पहले हालीवुड अभिनेता विल स्मिथ की नई फिल्म ' आफ्टर अर्थ' का प्रोमो देखा। कुछ रूचि जागी तो उसकी कहानी के बारे में जाना। ये सब करते हुए मन में कवि अटल बिहारी वाजपेयी की एक कविता की ये पंक्तिया उभरने लगी ' पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानी, जीवन एक अनन्त कहानी'. पृथ्वी और मानव मेरी नज़र में अब भी बहुत रहस्यमयी और खोज के विषय हैं क्योकि इनके बारे में अब तक जो ज्ञान हमारे पास है, वो बहुत शैशव अवस्था में है। ' आफ्टर अर्थ' की कहानी एक ऐसी सभ्यता की है, जो पृथ्वी छोड़ कर एक दुसरे ग्रह ' नोवा प्राइम' पर सर्वाइव कर रही है। पृथ्वी अब एक बेजान ग्रह है और बड़े ज्वालामुखी विस्फोटो और भूकम्पों ने इसे तबाह कर दिया है। लगभग एक हज़ार साल बाद बाप-बेटे की जोड़ी एक स्पेस शिप में अपने पुराने घर सौर मंडल से गुजर रहे हैं और एक दुर्घटना हो जाती है, मज़बूरी पिता-पुत्र को अंधकारमय पृथ्वी पर पहुंचा देती है। मेन इन ब्लैक सहित कई साइंस फिक्शन फिल्मों में काम कर चुके विल हमेशा ही इस तरह के विषयों की तलाश में रहते हैं। एक दिन घर पर आराम करते हुए वे डिस्कवरी चैनल पर ' आई शुड़ नॉट बी अलाइव' देख रहे थे। मौत को पछाड़ कर जीते साहसी लोगो की कहानियों पर आधारित शो में उस दिन एक ऐसे बाप बेटे की कहानी दिखाई जा रही थी, जिनकी कार दुर्घटनाग्रस्त होकर हज़ार फीट गहरी खाई में जा गिरी है। बाप बुरी तरह घायल है और चल नहीं सकता। ऐसे में पन्द्रह साल का बेटा हिम्मत दिखाकर पिता के लिए जीवन रक्षक की भूमिका निभाता है। इस सच्ची कहानी को देखते हुए ही विल के मन में ' आफ्टर अर्थ' के विचार ने जन्म लिया। उन्होंने इस कहानी को खूबसूरती के साथ एक विज्ञान कथा में बदल दिया। अब जरुरत थी ऐसे निर्देशक की, जो विल की कहानी को हुबहू परदे पर जिन्दा कर सके। विल ने इसके लिए भारतीय मूल के निर्देशक एम नाईट श्यामलन को चुन लिया। श्यामलन ने अपने करियर की शुरुआत एक एलियन फिल्म ' साइंस' से की थी। रहस्यमयी कहानियो को उनके मूल भाव में पेश करने में श्यामलन को महारत हासिल है। हालाँकि भारतीय मूल का होने के कारण उनकी काबिलियत को उतना सम्मान नहीं दिया जाता। श्यामलन के खाते में 'साइंस' के अलावा ' द विलेज' , हेप्पनिंग, द लास्ट एयर बेंडऱ जैसी बेहतरीन फिल्मे दर्ज हैं। देखना रोचक होगा कि आफ्टर अर्थ' को उन्होंने किस तरह परदे पर उतारा है। पृथ्वी और समूचे अनंत ब्रम्हांड के बारे में प्राचीन काल के लेखकों ने कई अद्भत जानकारिया दी हैं। जैसे पृथ्वी की अपनी बुद्धिमता है और उसकी ये इंटेलिजेंस मौसमों, फूलों, नदियों, पशु-पक्षियों में बखूबी दिखाई देती है। तीस के दशक में एक मशहूर गणितज्ञ ' जी डी आस्पेंसकी' ने बताया कि मानव सभ्यता को 'सुपर पावर' की ओर से एक नियत समय मिला है। इस नियत समय में हमें पृथ्वी से बाहर अपना ठिकाना ढूँढना ही होगा वर्ना पृथ्वी खुद ही हमारी सभ्यता का अंत कर देगी। यही बात लगभग पचास साल बाद महान वैज्ञानिक ' स्टीफन हाकिंग ने भी दोहराई है। उन्होंने भी दूसरा 'ठिकाना' खोजने पर बल दिया है। ये हम नहीं जान पाएंगे कि हमारे पास कितना वक्त है क्योकि वो बताने वाले लोग दुनिया की भीड़ में अदृश्य हो चुके हैं। आफ्टर अर्थ' को देखते हुए शायद हम आज से पाच हज़ार साल बाद की उस मानव सभ्यता का भाव महसूस कर सके जो शायद इसी तरह पृथ्वी को देखने आये। वे भविष्य में अपने उन्नत स्पेस शिप में देखने आए कि उनके 'अल्प विकसित' पूर्वज यहाँ रहते थे। शायद वे उस हुमक को महसूस कर पाए, जो आज हमारे अन्दर किसी खेत, बरसात या झरने को देखकर खुद ही उठने लगती है.

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