Sunday, June 2, 2013

क्रिकेट ने छोड़ दी आजादी की उम्मीद

नंदन वन के  निवासी क्रिकेट देखना बहुत पसंद करते थे और इसलिए वहां  के क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अपने निवासियों के लिए नंदनवन प्रीमियर लीग शुरू किया। शुरुआत में तो एनपीएल जबरदस्त हिट रहा लेकिन अचानक एक बड़े खुलासे ने वन के निवासियों को दहला दिया। पता चला कि एनपीएल की एक टीम तेन्नै लोफर किंग्स का मालिक बुकीनाथ सटटपंम  नंदनवन के टीवी चेनलों में काम करने वाले चिंदु खाया सिंह के साथ मिलकर मेच फिक्स कर रहा है। और पता चला कि बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन नंदनवन (बीसीसीएन) का चीफ श्रीनिर्वासन बुकीनाथ का ससुर है। फिर तो क्या था वन के न्यूज़ चैनल श्रीनिर्वासन और बुकीनाथ की जड़े खोदने में लग गए। कुर्सी कमजोर है ये जान, बीसीसीएन का खजाना पूर्व में खाली कर चुके कुछ चोर अचानक हरकत में आ गए। वन के एक नेता नरक गंवार  ने सोचा, सही वक्त है अपने प्यादे को चीफ बनाने का। तुरंत उन्होंने टीवी चैनल को बयान दे डाला कि अब तो कुर्सी छोडो। क्रिकेट प्रेमियों को ऐसे बयान अपने जख्मो पर मरहम की तरह लग रहे थे। इस बीच वन की विरोधी राजनीतिक पार्टी नंदन जनता पार्टी ( नजपा ) के एक नेता तरुण केतली ने हुंकार भरी और वन की भोली-भाली जनता से वादा किया कि वे 24 घन्टे में श्रीनिर्वासन की कुर्सी लेकर रहेंगे। इस बीच श्रीनिर्वासन का मुंह ये बोलते-बोलते दुखने लगा था कि ' व्हाई शुड आय रिजाइन'. उधर ये खबर तेज़ी से वन में फैली कि वन के प्रधानमंत्री मौन चुपप्न सिंह बोल पड़े हैं। उन्होंने कहा ' खेल को बचाने की जरुरत है, जब तक जांच चले, कुछ कहना ठीक नहीं है। हमेशा की तरह उन्होंने ये नहीं बताया कि वे खुद क्या करेंगे। उधर टीम नंदन विदेश दौरे पर जा रही थी तब कुछ बदमाश ' इमानदार' किस्म के पत्रकारों ने टीम नंदन के कप्तान एडेंद्र सिंह पोनी से सवाल किये लेकिन पता चला कि पोनी केवल छह बार मुस्कुराए थे। क्रिकेट प्रेमी फिर उदास हो गए। फिर दुसरे दिन बीसीसीएन के संयुक्त सचिव मनुराग खागुर ने एक अर्जेंट बैठक बुलाई। अब सभी को भरोसा था कि श्रीनिर्वासन की कुर्सी अब जायेगी। मनुराग, तरुण केतली सभी ने कैमरों के सामने कहा कि श्रीनिर्वासन से इस्तीफा लेकर रहेंगे। मीटिंग शुरू हुई लेकिन बयानबाजी करने वाले मुंह मीटिंग में बंद ही रहे। जागरूक मीडिया बता रहा था कि श्रीनिर्वासन से किसी ने इस्तीफा नहीं माँगा। किसी को नहीं मालूम था कि इस मीटिंग समेत सारा खेल पहले ही फिक्स हो चुका है। इन सबमे एक बड़ा खिलाडी ठगसोहन  झोल्मिया शामिल हो चुका था। इस पर पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके थे। पता चला  कि केतली चाहते हैं कि ठगसोहन ही श्रीनिर्वासन की कुर्सी संभाल सकता हैं। मीटिंग खत्म हुई और पता चला कि ' क्रिकेट' के हित में फैसला लिया गया है कि श्रीनिर्वासन इस्तीफा नहीं देंगे और ठगसोहन जांच पूरी होने तक अंतरिम अध्यक्ष बने रहेंगे। शाम ढल चुकी थी और नंदनवन में ऐसी मायूसी छाई थी जैसे पडोसी देश चन्दन वन से मैच हार कर टीम नंदन ने नाक कटा दी हो। एक क्रिकेट प्रेमी उदास सा क्रिकेट पिच की ओर  देख रहा था और क्रिकेट एक सटोरिये की जेब में पड़ा अपने आजाद होने की उम्मीद छोड़ चुका था।



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