देश में मच रही राजनीतिक खींचतान को अपने शो में पेश करने वाले पुण्य प्रसुन वाजपेयी जब रात को आजतक के मंच पर सलमान खान की आने वाली फिल्म बजरंगी भाईजान पर आधे घंटे का शो पेश करते हैं तो उसके मायने क्या होते हैं। गंभीर विषयों पर बात करने वाला एक पत्रकार सलमान खान की फिल्म पर एक रिपोर्ट पेश करता है। थोड़ा अटपटा सा लगता है ना। मुझे भी लगा था लेकिन जब शो शुरू हुआ तो सबकुछ स्पष्ट होता चला गया। बात हालिया रिलीज बाहुबली और सलमान खान की आगामी फिल्म बजरंगी भाईजान के बारे में चल रही थी।वाजपेयी जी का कहना था कि बाहुबली की सफलता सलमान के लिए बड़ी चुनौती है, अब वे इससे कैसे निपटेंगे। (ध्यान दें वे यहां बाहुबली की प्रशंसा नहीं कर रहे बल्कि उसे बजरंगी भाईजान के लिए एक खतरा बता रहे हैं) इसके बाद वे दूसरे खानों की फिल्मों की वल्र्डवाइड कमाई बताकर ये दर्शाते हैं कि बाहुबली के लिए खान तिकड़ी के बैरियर आखिर कौन से है जो दक्षिण की इस फिल्म को लांघने पड़ेंगे। यहां तक तो सब ठीक था लेकिन जब महाशय ने खान तिकड़ी की फिल्मों के आंकड़े गिनाने शुरू किए तो मेरा माथा ठनका। लगा जरूर कोई न कोई गड़बड़ है लेकिन उससे बड़ा सवाल यह था कि आखिरकार पुण्यजी ये कार्यक्रम क्यो चला रहे हैं।
इसके निहित कारणों को खोजना भी जरूरी था। लिहाजा अंर्तजाल पर लंबी खोज का सिलसिला शुरू हुआ। विभिन्न वेबसाइटों के आंकड़ों से मिलान करने के बाद मालूम हुआ कि पीके, धूम-3, किक, चेन्नई एक्सप्रेस आदि फिल्मों के आंकड़े दिखाने में बड़ा गोलमाल किया गया है। ये बात सही है कि सलमान-आमिर-शाहरूख हिंदी फिल्म उद्योग के बड़े सितारे हैं लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि उन्हें छोड़कर बाकी फिल्म उद्योग प्रतिभाहीन है और हिट फिल्में नहीं बना सकता। पुण्यजी ने जब पीके का वल्र्ड वॉइड कलेक्शन 700 करोड़ से ज्यादा बताया तो मेरी भी आंखें फटकर चौड़ी हो गई।
पीके 2013 मार्च तक सिनेमाघरों में बनी रहती है और उसका कलेक्शन भारत में 324 करोड़ का होता है। विदेशों में भी फिल्म कमाई करती है लेकिन इतनी नहीं कि 700 करोड़ पार कर जाए। एनडीटीवी और दूसरी वेबसाइट वल्र्ड वाइड कलेक्शन 650 करोड़ तक बताते हैं और आजतक पर पुण्य प्रसुन इसी आंकड़े को पता नहीं कैसे 735 करोड़ तक पहुंचा देते हैं। किक का कलेक्शन वे 336 करोड़ बताते हैं जबकि भारत में ये फिल्म 2014 सितंबर तक 214 करोड़ ही कमा पाती है।
पुण्य प्रसुन ने बड़ी चतुराई से बाहुबली के सामने एक भ्रामक आंकड़े का बैरियर बना दिया। अपने हिसाब से आंकड़े पेश करने वाले ये न्यूज चैनल और वेबसाइट आखिरकार ये क्यों नहीं बता पाते कि पीके ने यदि भारत में 324 करोड़ कमाए थे तो बाकी कलेक्शन किन देशों में और कितना हुआ था। किक समेत यहां बहुत सी फिल्मों के आंकड़ों में बाजीगरी की गई है। अब सवाल उठता है कि आजतक के महत्वपूर्ण प्राइम टाइम में बाहुबली और बजरंगी भाईजान का जिक्र क्यों हुआ और अंग्रेजी अखबार और वेबसाइट इस फिल्म को तवज्जो क्यों नहीं दे रहे हैं।
मुझे याद है कि लंबे समय से दक्षिण की फिल्मों और उनके कलाकारों का मुंबई में स्वागत नहीं होता है। कमल हासन, रजनीकांत, श्रीदेवी और जाने कितने नाम है जो मुंबई फिल्म उद्योग की गंदी राजनीति का शिकार हुए हैं। दक्षिण की अच्छी फिल्मों को समीक्षक अच्छे रिव्यू नहीं देते हैं। अनिल कपूर की नायक और कमल हासन की हिंदुस्तानी को जो प्यार यहां के कलमकारों से मिलना चाहिए था, नहीं मिला। श्रीदेवी जरूर धरतीपकड़ पहलवान निकली और अपना मुकाम बनाकर दिखाया।
बाहुबली तो अकड़ के साथ तुम्हारे मैदान में घुस आया है। अच्छा यहीं होगा कि छल-बल से उसे परास्त करने के बजाय अपने प्रदर्शन में इतना सुधार लाओ कि दर्शक तुम्हें भी उतना ही प्यार दे। एक बता बताता चलूं कि हिंदुस्तान के दर्शक जितना खान तिकड़ी को चाहते हैं उतना प्यार शायद राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन को ही नसीब हुआ है। तुमने उस प्यार को अपनी बपौती समझ लिया है। इन दिनों दो फिल्मों ने तुम बॉलीवुड वालों के अखाड़े में भयंकर उधम मचा रखा है। जुरासिक वल्र्ड और बाहुबली को टक्कर तो तुम दे नहीं पा रहे हो और व्यर्थ की आंकड़ेबाजी में उलझे हो।
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