Wednesday, July 8, 2015

जिन्दा है 'जुरासिक परंपरा'

'जुरासिक वर्ल्ड ' में निर्देशन से लेकर प्रोडक्शन तक कहीं भी इस परम्परा के जनक स्टीवन स्पीलबर्ग की महत्वाकांक्षी फिल्म 'रोबोकेलिस्प ' निर्माण की प्रक्रिया से गुजर रही है. हालांकि वे फिल्म के एक्सिक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में अपनी सेवाएं देते रहे हैं  और अदृश्य रूप से वे जुरासिक वर्ल्ड के हर फ्रेम में मौजूद है.  इस  फिल्म को निर्देशित करने वाले कॉलिन ट्रेवोरो इस वक्त 38  साल के  हैं. उन्होंने द लॉस्ट वर्ल्ड - जुरासिक पार्क(1993 ) अपने स्कूली दिनों में देखी थी जब वे महज एक स्कूली
छात्र थे. तब से ही वे स्पीलबर्ग जैसा निर्देशक बनना चाहते थे. 2015 में उन्हें वो मौका मिलता है जिसकी उन्हें जाने कब से ख्वाहिश थी. फिल्म प्रदर्शित होती है और आय के कई रिकार्ड टूट जाते है. क्या था स्पीलबर्ग का वो आइडिया जिसका डीएनए इस फिल्म की रग-रग में दौड़ रहा है.

स्पीलबर्ग ने 2003 में ही ये कल्पना कर ली थी कि फिल्म के इस भाग में 'जेनेटिकली मोडीफाइड' डायनासॉर को कहानी का मुख्य बिंदु बनाया जा सकता है.  दो प्रजातियों के डीएनए में फेरबदल कर नई प्रजाति को जन्म देना, टेस्ट ट्यूब की कोख में विकसित प्रजाति का जीव कैसा होगा, ये इस फिल्म में बखूबी दिखाया गया है. इंडो माइनस रेक्स नाम की लेब में तैयार की गई मादा डायनासॉर अपना बाड़ा तोड़ उस ओर भाग निकली है, जहाँ हज़ारो बच्चे डायनासॉर थीम पार्क का मजा ले रहे हैं. अकेली लेब में बड़ी हुई इस खूंखार  इंडो माइनस को रिश्तो की समझ नहीं है, उसे केवल शिकार करना आता है. और सबसे डरावनी बात ये है कि इंडो आधी डायनासॉर और आधी छिपकली है. अपना रंग वातावरण के अनुरूप बदल सकती है.

फिल्म की कहानी के केंद्र में ये डायनासौर और चार प्रशिक्षित रेप्टर भी है. इन्हे ओवन ग्रेडी ने प्रशिक्षण दिया है. फ़ौज का एक आदमी इस ताकत को अफगानिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहता है. मझे ये देखकर सुखद आश्चर्य हुआ कि हॉलीवुड के बड़े बजट की इस फिल्म में इरफ़ान खान को अच्छा खासा फुटेज दिया गया है. ये गेट्स-वेट्स की तुलना में बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जायेगी। उन्होंने बेहद सलीके का अभिनय किया है और फीस शायद अपने 'तीनो खानों' से पांच गुनी पाई है.

स्पीलबर्ग की 'जुरासिक परम्परा' पर ये फिल्म पूरी तरह खरी उतरी है. खून जमा देने वाला रोमांच आखिरी सीन में एक मारक सन्देश देकर समाप्त होता है।  इंडो माइनस पर काबू पाने के लिए ट्रायनासोरस रेक्स को बाड़े से आज़ाद कर दिया जाता है. ट्रायनासोरस 'शुद्ध' डायनासॉर है और बहुत लड़ाकू है. फिल्म सन्देश देती है कि दो प्रजातियों के डीएनए से छेड़छाड़ कर एक नया जीव विकसित करना मानवता के लिए खतरा बन सकता है. मनुष्यों में भी इस तरह के प्रयास भविष्य में घातक साबित हो सकते है. 

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